Monday, 21 December 2015

हमैं ना पसंद २५ Dec

🙏🏻 एक नम्र निवेदन 🙏🏻
सभी सनातनी वैष्णवों से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि इस बार क्रिसमस ( 25 दिसंबर ) पर अपने क्षेत्र के किसी भी मंदिर में विराजमान ठाकुर जी को क्रिसमस की ड्रेस (सांताक्लाज़ वाली) ना पहनाएं
ये हमारे सनातन हिन्दू धर्म के खिलाफ है.....!!
आखिर आप लोग क्यों व कैसे भूल जाते हैं कि हम श्रीराम व श्रीकृष्ण के वंशज हैं ना कि सूली पर लटके हुये ईसा मसीह के.....
क्या कभी आपने ईसाईयों को देखा है जन्माष्टमी, रामनवमी, शिवरात्रि, नवरात्र इत्यादि त्यौहारों पर मन्दिरो में आकर तिलक लगाकर घंटी बजाते हुये ? जो हम चर्चों में जाकर मोमबतियाँ जलायें ..... ???
सोच आपकी फैसला भी आपका.....!!
याद रखो हमारी एकता ही भक्ति की निशानी है ।।
अगर आप सच्चे सनातनी वैष्णव देशभक्त हैं तो इस मैसेज को हर भारतीय सनातनी हिन्दू तक शेयर करें ।।
ये देश हमारा है ना कि उनका जिश्ने हमै गुलाम बना के रखा
‪#‎फिरभीदिलहैहिन्दुस्तानी‬

Friday, 18 September 2015

वो तीन लोग ।

एक लड़की थी रात को office से
वापस लौट रही थी

देर भी हो गई थी...
पहली बार ऐसा हुआ

और काम भी ज्यादा था तो
Time का पता ही नहीं चला

वो सीधे auto stand पहुँची
वहाँ एक लड़का खड़ा था
वो लड़की उसे देखकर डर गई

कि कहीं उल्टा सीधा ना हो जाए
तभी वो लड़का पास आया

और कहा - बहन तू
मौका नहीं जिम्मेदारी है मेरी

और जब तक तुझे कोई गाड़ी
नहीं मिल जाती

मैं तुम्हे छोड़कर
कहीं नहीं जाऊँगा
don't worry.


वहाँ से एक auto वाला
गुजर रहा था

लडकी को अकेली
लड़के के साथ देखा

तो तुरंत auto रोक दिया
और कहा -  कहाँ जाना है मैडम??

आइये मैं आपको छोड़ देता हूँ
लड़की auto में बैठ गई।

रास्ते में वो auto वाला
बोला - तुम मेरी बेटी जैसी हो ।

इतनी रात को तुम्हें अकेला देखा
तो auto रोक दिया।

आजकल जमाना खराब है ना
और अकेली लड़की मौका नहीं
जिम्मेदारी होती है।

लड़की जहाँ रहती थी
वो एरिया आ चुका था।

वो auto से उतर गई
और auto वाला चला गया।


लेकिन अब भी लड़की को
दो अंधेरी गलियों से होकर
गुजरना था

वहाँ से चलकर
जाना था

तभी वहाँ से पानीपूरी वाला
गुजर रहा था

शायद वो भी काम से
वापस घर की ओर
जा रहा था

लड़की को अकेली देखकर कहा - आओ! मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूँ

उसने अपने ठेले को
वहीं छोड़कर

एक टोर्च लेकर उस लड़की के साथ
अंधेरी गली की और निकल पड़ा

वो लड़की घर पहुँच चुकी थी।

आज किसी की बेटी,
बहन सही सलामत
घर पहुँच चुकी थी।

मेरे भारत को तलाश है
ऐसे तीन लोगों की -

1) वो लडका जो
auto stand पर खडा था।

2)वो auto वाला।

और

3) वो पानीपूरी वाला।

जिस दिन ये तीन लोग
मिल जाएंगे

उस दिन मेरे भारत में
रेप होना बंद हो जाएगा

तभी आएंगे अच्छे दिन।।

Wednesday, 20 May 2015

भारत में मुसलमानो के 800 वर्ष के शासन का झूठ

क्या भारत में मुसलमानो ने 800 वर्षो तक शासन किया है। सुनने में यही आता है पर न कभी कोई आत्ममंथन करता है और न इतिहास का सही अवलोकन।
प्रारम्भ करते है मुहम्मद बिन कासिम से।
भारत पर पहला आक्रमण मुहम्मद बिन ने 711 ई में सिंध पर किया। राजा दाहिर पूरी शक्ति से लड़े और मुसलमानो के धोखे के शिकार होकर वीरगति को प्राप्त हुए। दूसरा हमला 735 में राजपुताना पर हुआ जब हज्जात ने सेना भेजकर बाप्पा रावल के राज्य पर आक्रमण किया। वीर बाप्पा रावल ने मुसलमानो को न केवल खदेड़ा बल्कि अफगानिस्तान तक मुस्लिम राज्यो को रौंदते हुए अरब की सीमा तक पहुँच गए। ईरान अफगानिस्तान के मुस्लिम सुल्तानों ने उन्हें अपनी पुत्रिया भेंट की और उन्होंने 35 मुस्लिम लड़कियो से विवाह करके सनातन धर्म का डंका पुन बजाया। बाप्पा रावल का इतिहास कही नहीं पढ़ाया जाता यहाँ तक की अधिकतर इतिहासकर उनका नाम भी छुपाते है। गिनती भर हिन्दू होंगे जो उनका नाम जानते है। दूसरे ही युद्ध में भारत से इस्लाम समाप्त हो चूका था। ये था भारत में पहली बार इस्लाम का नाश
अब आगे बढ़ते है गजनवी पर। बाप्पा रावल के आक्रमणों से मुसलमान इतने भयक्रांत हुए की अगले 300 सालो तक वे भारत से दूर रहे। इसके बाद महमूद गजनवी ने 1002 से 1017 तक भारत पर कई आक्रमण किये पर हर बार उसे भारत के हिन्दू राजाओ से कड़ा उत्तर मिला। महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर भी कई आक्रमण किये पर 17वे युद्ध में उसे सफलता मिली थी। सोमनाथ के शिवलिंग को उसने तोडा नहीं था बल्कि उसे लूट कर वह काबा ले गया था जिसका रहस्य आपके समक्ष जल्द ही रखता हु। यहाँ से उसे शिवलिंग तो मिल गया जो चुम्बक का बना हुआ था पर खजाना नहीं मिला।
भारतीय राजाओ के निरंतर आक्रमण से वह वापिस गजनी लौट गया और अगले 100 सालो तक कोई भी मुस्लिम आक्रमणकारी भारत पकर आक्रमण न कर सका। 1098 में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज राज चौहान को 16 युद्द के बाद परास्त किया और अजमेर व् दिल्ली पर उसके गुलाम वंश के शासक जैसे कुतुबुद्दीन इल्तुमिश व् बलबन दिल्ली से आगे न बढ़ सके। उन्हें हिन्दू राजाओ के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। पश्चिमी द्वारा खुला रहा जहाँ से बाद में ख़िलजी लोधी तुगलक आदि आये ख़िलजी भारत के उत्तरी भाग से होते हुए बिहार बंगाल पहुँच गए। कूच बिहार व् बंगाल में मुसलमानो का राज्य हो गया पर बिहार व् अवध प्रदेश मुसलमानो से अब भी दूर थे। शेष भारत में केवल गुजरात ही मुसलमानो के अधिकार में था। अन्य भाग स्वतन्त्र थे
1526 में राणा सांगा ने इब्राहिम लोधी के विरुद्ध बाबर को बुलाया। बाबर ने लोधियों की सत्ता तो उखाड़ दी पर वो भारत की सम्पन्नता देख यही रुक गया और राणा सांगा को उसमे युद्ध में हरा दिया। चित्तोड़ तब भी स्वतंत्र रहा पर अब दिल्ली मुगलो के अधिकार में थी। हुमायूँ दिल्ली पर अधिकार नहीं कर पाया पर उसका बेटा अवश्य दिल्ली से आगरा के भाग पर शासन करने में सफल रहा। तब तक कश्मीर भी मुसलमानो के अधिकार में आ चूका था। अकबर पुरे जीवन महाराणा प्रताप से युद्ध में व्यस्त रहा जो बाप्पा रावल के ही वंशज थे और उदय सिंह के पुत्र थे जिनके पूर्वजो ने 700 सालो तक मुस्लिम आक्रमणकारियो का सफलतापूर्वक सामना किया।
जहाँहुर व् शाहजहाँ भी राजपूतो से युद्धों में व्यस्त रहे व् भारत के बाकी भाग पर राज्य न कर पाये। दक्षिण में बीजापुर में तब तक इस्लाम शासन स्थापित हो चुका था। औरंगजेब के समय में मराठा शक्ति का उदय हुआ और शिवाजी महाराज से लेकर पेशवाओ ने मुगलो की जड़े खोद डाली। शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य को बाजीराव पेशवा ने भारत में हिमाचल बंगाल और पुरे दक्षिण में फैलाया। दिल्ली में उन्होंने आक्रमण से पहले गौरी शंकर भगवान् से मन्नत मांगी थी की यदि वे सफल रहे तो चांदनी चौक में वे भव्य मंदिर बनाएंगे जहाँ कभी पीपल के पेड़ के नीचे 5 शिवलिंग रखे थे। बाजीराव ने दिल्ली पर अधिकार किया और गौरी शंकर मंदिर का निर्माण किया जिसका प्रमाण मंदिर के बाहर उनके नाम का लगा हुआ शिलालेख है। बाजीराव पेशवा ने एक शक्तिशाली हिन्दुराष्ट्र की स्थापन की जो 1830 तक अंग्रेजो के आने तक स्थापित रहा। मुगल सुल्तान मराठाओ को चौथ व् कर देते रहे और केवल लालकिले तक सिमित रह गए। और वे तब तक शक्तिहीन रहे जब तक अंग्रेज भारत में नहीं आ गए। 1760 के बाद भारत में मुस्लिम जनसँख्या में जबरदस्त गिरावट हुई जो 1800 तक मात्र 7 प्रतिशत तक पहुँच गयी थी। अंग्रेजो के आने के बाद मुसल्मानो को संजीवनी मिली और पुन इस्लाम को खड़ा किया गया ताकि भारत में सनातन धर्म को नष्ट किया जा सके इसलिए अंग्रेजो ने 50 साल से अधिक समय से पहले ही मुसलमानो के सहारे भारत विभाजन का षड्यंत्र रच लिया था। मुसलमानो के हिन्दुविरोधी रवैये व् उनके धार्मिक जूनून को अंग्रेजो ने सही से प्रयोग किया।
असल में पूरी दुनिया में मुस्लिम कौम सबसे मुर्ख कौम है जिसे कभी ईसाइयो ने कभी यहूदियो ने कभी अंग्रेजो ने अपने लाभ के लिए प्रयोग किया। आज उन्ही मुसलमानो को पाकिस्तान में हमारी एजेंसीज अपने लाभ के लियर प्रयोग करती है जिस पर अधिक जानने के लिए अगली पोस्ट की प्रतीक्षा करे।
ये झूठ इतिहास क्यों पढ़ाया गया।
असल में हिन्दुओ पर 1200 सालो के निरंतर आक्रमण के बाद भी जब भारत पर इस्लामिक शासन स्थापित नहीं हुआ और न ही अंग्रेज इस देश को पूरा समाप्त करे तो उन्होंने शिक्षा को अपना अस्त्र बनाया और इतिहास में फेरबदल किये। अब हिन्दुओ की मानसिकता को बसलन है तो उन्हें ये बताना होगा की तुम गुलाम हो। लगातार जब यही भाव हिन्दुओ में होगा तो वे स्वयं को कमजोर और अत्याचारी को शक्तिशाली समझेंगे। अत: भारत के हिन्दुओ को मानसिक गुलाम बनाया गया जिसके लिए झूठे इतिहास का सहारा लिया गया और परिणाम सामने है। लुटेरे और चोरो को आज हम बादशाह सुलतान नामो से पुकारते है उनके नाम पर सड़के बनाते है शहरो के नाम रखते है है और उसका कोई हिन्दू विरोध भी नहीं करता जो बिना गुलाम मानसिकता के संभव नहीं सकता था 
इसलिए इतिहास बदलो
मन बदलो
और गुलाम बनाओ
यही आज तक होता आया है
जिसे हमने मित्र माना वही अंत में हमारी पीठ पर वार करता है। इसलिए झूठे इतिहास और झुठर मित्र दोनों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
शेयर अवश्य करे।
क्या पता आप अपने किसी मित्र के मन से ये गुलामी का भाव निकाल दे की हम कभी किसी के दास नहीं बल्कि शक्तिशाली थे जिन्होंने 1200 सालो तक विदेशी मुस्लिम लुटेरो और अंग्रेजो का सामना किया और आज भी जीवित बचे हुए है।

Sunday, 17 May 2015

सेकुलर की सीख

एक दिन एक कौवे के बच्चे ने कौवे से कहा कि हमने लगभग हर चार पैर वाले जीव का माँस खाया है, मगर आज तक दो पैर पर चलने वाले जीव का माँस नहीं खाया है..
पापा कैसा होता है इंसानों का माँस ?
कौवे ने कहा मैंने भी जीवन में तीन बार ही खाया है, बहुत ही स्वादिष्ट होता है..
कौवे के बच्चे ने कहा तो आज मुझे भी खाना है..
कौवे ने थोड़ी देर सोचने के बाद कहा चलो खिला देता हूँ..
बस मैं जैसा जैसा मैं कह रहा हूँ तुम भी वैसे ही करना..
मैंने भी ये तरीका अपने पुरखों से ही सीखा है..
कौवे ने अपने बेटे को एक जगह रुकने को कहा और थोड़ी देर बाद माँस के दो टुकड़े उठा लाया..
कौवे के बच्चे ने खाया तो कहा की ये तो जानवर के माँस जैसा लग रहा है..
कौवे ने कहा अरे ये खाने के लिए नहीं है..
इससे तो ढेर सारा माँस बनाया जा सकता है..
जैसे दही जमाने के लिए थोड़ा सा दही दूध में डाल कर छोड़ दिया जाता है,
वैसे ही इसे कहीं-कहीं छोड़ कर आना है..
बस फिर देखना कल तक कितना स्वादिष्ट माँस मिलेगा, और वो भी मनुष्य का..
कौवे के बच्चे को बात समझ में नहीं आई मगर वो कौवे का
जादू देखने के लिए उत्सुक था तो वो कौवे के पीछे पीछे चलता चला गया ..
कौवे ने उन दो माँस के टुकड़ों में से एक टुकड़ा एक मंदिर में और दूसरा पास की एक मस्जिद में गिरा दिया..
तब तक शाम हो चली थी, कौवे ने कहा अब कल सुबह तक हम सभी को ढेर सारा दो पैर वाले जीव का माँस मिलने वाला है.
बस फिर क्या ......... सुबह सवेरे कौवे और उसके बच्चे ने देखा तो सचमुच गली-गली में मनुष्यों की कटी और जली लाशें बिखरी पड़ीं थीं..
हर तफ़र सन्नाटा था..
पुलिस सड़कों पर घूम रही थी..
कर्फ्यू लगा हुआ था..
आज कौवे के बच्चे ने भी कौवेे से दो पैर वाले मनुष्य का शिकार करना सीख लिया था..
कौवे के बच्चे ने कौवे से पूछा अगर दो पैर वाला मनुष्य हमारी चालाकी समझ गया तो हमारा ये तरीका तो बेकार हो जायेगा..
कौवे ने कहा सदियाँ गुज़र गईं मगर आज तक दो पैर वाला मनुष्य हमारे इस जाल में फंसता ही चला आ रहा है..
सूअर या गाय के माँस का एक जरा सा टुकड़ा, इन हजारों दो पैर वाले मनुष्यो को पागल कर देता है,
वो एक दूसरे को ही मारने - काटने लग जाते हैं और हम आराम से उन्हें खाते हैं..
मुझे नहीं लगता की कभी भी उसे इतनी अक़ल आने वाली है, चाहे को कितना भी पड़ा लिखा व समझदार क्यों न हो जाये पर ये नहीं समझ पाता ह की केवल मांस के टुकड़े से कुछ नहीं होता ।
कौवे के बेटे ने कहा क्या कभी भी किसी ने इन्हें समझाने की कोशिश नहीं की..
कौवे ने कहा एक बार एक ने इन्हें समझाने की कोशिश की थी, मनुष्यों ने उसे सेकुलर सेकुलर कह के मार दिया..
इस कहानी का उद्देश्य केवल मात्र मानव को समझाना हे न की किसी धर्म या मजहब को किसी प्रकार से ठेस पहुँचाना । हम सब एक हे सभी में लाल रक्त का प्रवाह होता हे। जब कोई भी बच्चा पैदा होता हे तो उसका कोई धर्म या मजहब नही होता ये धर्म या मजहब तो यहाँ हम इस दुनिया में आने पर उसे देते हे ।
काश ये छोटी छोटी सी बातें हम सभी इंसानो को समझ आ सके तो पूरी दुनिया में खुशनुमा माहोल हो जायेगा और ये दुनिया ही स्वर्ग से कम नहीं होगी ।
Narsikar Renukadas

Wednesday, 5 June 2013

Factors affecting democracy


Religion 

Religion 

as a major cultural influence plays an important role in politics. Political party support depends greatly on differentiating the electorate along religious lines. The major religious communities are those of the Hindus (although not a homogeneous block), the Muslims (again they too are differentiated as Shias and Sunnis) and the Sikhs; and many political parties are identified by the religion of their supporters. Many national religious issues are the key points of the success in elections. Even some of the political leaders use religion for their own sake and as a medium for their political stability.

Caste 

The caste system crosses religious boundaries to affect both Hindu and Muslim people. Hindus have four main castes and hundreds of sub-castes. Many political parties draw supporters from specific castes or sub-castes. The four main castes are Brahmins, kshatriyas, vaishyas and shudras. Brahmins, historically, were the upper caste and presided over religious rituals. Kshatriyas were rulers and warriors. Vaishyas were merchants, businessmen etc. Shudras were the most oppressed and mostly worked for other castes and were involved in the so-called 'impure' professions like cleaning and handling of corpses.

Population 

India is the second most populous country in the world, next only to China. The over a billion population poses a challenge to the state's ability to provide everyone with jobs, health-care, education and other public services. Slowing down the rate of population growth has been a major issue for governments, over time. India being a democratic country the ever increasing population can only be checked by voluntary means, with the informed consent of the people.[2] With the current growth rate, India is set to leave China behind by 2020.

Development 

India is still an emerging economy, setting the pace and shape of development. India began as an explicitly socialist nation and continues with a large public-sector and many constraints on private enterprise, although recent governments have reduced some of these restrictions. Their reward has been faster economic growth, particularly through the growth of trade-oriented industry. Some recent governments were voted out due to a sluggish economy.

Regions 

India is very densely populated. Some advocate[who?] splitting some twenty eight states and seven union territories.It is the second most populated country of the world

Other factors 

Factors such as education, corruption, women's issues, student politics, criminalization of politics, leadership strategies and the design of political institutions affect national and local politics.[3]Some other factors such as the caste issue, environment policy, new long-term investment in the economy by foreigners etc., also have a bearing.

Illiteracy 

In India around 25% of people are illiterate.

Criticisms 

Abuse of Power by the Elected Representatives 

The election process in India is pivoted around the commonwealth concept of representative democracy which was once thought to save the world from monarchy and autocracy. Even though the representative form of democracy has succeeded in driving the nation for the past 60 years, in practice it has yet to be implemented fully. Some of the elected representatives enjoy all their privileges without being accountable for their duties, the dereliction of which goes unchecked along with influence peddling, nepotism, cronyism and willful negligence. They walk away scot-free, have no qualms about wrongdoing and get elected yet again, which bears testimony to their denigration of the democracy in India

Elitism of Dynasties 

Of the 65 years of post-independence rule, almost 60% of the time in office was held directly by Prime Ministers from the Nehru-Gandhi family and currently, some 12%, again by another member from the same family, where the power to rule vests in her by proxy, overlooking hundreds of other eligible, efficient though, unfortunate political activists. This trend is no different at the level of the states too. Leading politicians are often accused of declaring and initiating their sons, daughters and other progeny, as heirs apparent, giving them a headstart into power-politics.


Source:-  Wekipidia

Tuesday, 14 May 2013

जब चाणक्य ने लिया त्रिगुण परीक्षण

एक दिन चाणक्य का एक परिचित उनके पास आया और उत्साह से कहने लगा, 'आप जानते हैं, अभी-अभी मैंने आपके मित्र के बारे में क्या सुना है?' 

चाणक्य अपनी तर्क-शक्ति, ज्ञान और व्यवहार-कुशलता के लिए विख्यात थे।

उन्होंने अपने परिचित से कहा, 'आपकी बात मैं सुनूं, इसके पहले मैं चाहूंगा कि आप त्रिगुण परीक्षण से गुजरें।'

उस परिचित ने पूछा - 'यह त्रिगुण परीक्षण क्या है?'

चाणक्य ने समझाया- 'आप मुझे मेरे मित्र के बारे में बताएं, इससे पहले अच्छा यह होगा कि जो कहें, उसे थोड़ा परख लें, थोड़ा छान लें। इसीलिए मैं इस प्रक्रिया को त्रिगुण परीक्षण कहता हूं।

इस कसौटी के अनुसार जानना जरूरी है कि जो आप कहने वाले हैं, वह सत्य है। आप खुद उसके बारे में अच्छी तरह जानते हैं?'

'नहीं,' - वह आदमी बोला, 'वास्तव में मैंने इसे कहीं सुना था। खुद देखा या अनुभव नहीं किया था।'

'ठीक है,' - चाणक्य ने कहा, 'आपको पता नहीं है कि यह बात सत्य है या असत्य।

दूसरी कसौटी है -'अच्छाई। क्या आप मुझे मेरे मित्र की कोई अच्छाई बताने वाले हैं?'

'नहीं,' - उस व्यक्ति ने कहा।

इस पर चाणक्य बोले,' जो आप कहने वाले हैं, वह न तो सत्य है, न ही अच्छा। चलिए, तीसरा परीक्षण कर ही डालते हैं।'

'तीसरी कसौटी है - उपयोगिता। जो आप कहने वाले हैं, वह क्या मेरे लिए उपयोगी है?'

'नहीं, ऐसा तो नहीं है।' सुनकर चाणक्य ने आखिरी बात कह दी।'

आप मुझे जो बताने वाले हैं, वह न सत्य है, न अच्छा और न ही उपयोगी, फिर आप मुझे बताना क्यों चाहते हैं?'

aaj hamein iski sakht jaroorat hai....

Monday, 4 February 2013

Friendship


As we grow, we realize it becomes less important to have more friends and more important to have real ones.
Remember, life is kind of like a party.  You invite a lot of people, some leave early, some stay all night, some laugh with you, some laugh at you, and some show up really late.  But in the end, after the fun, there are a few who stay to help you clean up the mess.  And most of the time, they aren’t even the ones who made the mess.  These people are your real friends in life.  They are the ones who matter most.
Here are 15 things real friends do differently:
  1. They face problems together. – A person who truly knows and loves you – a real friend – is someone who sees the pain in your eyes while everyone else still believes the smile on your face.  Don’t look for someone who will solve all your problems; look for someone who will face them with you.
  2. They give what they can because they truly care. – One of the biggest challenges in relationships comes from the fact that many of us enter a relationship in order to get something.  We try to find someone who’s going to make us feel good.  In reality, the only way a relationship will last, and give us joy in the long-term, is if we see our relationship as a place we go to give, and not just a place we go to take.  Yes, of course it is okay to take something from a relationship too.  But both sides should be giving.  It can only be a ‘give and take’ if BOTH SIDES are GIVING.  That’s the key.
  3. They make time for each other. – It’s obvious, but any relationship without any face time is going to have problems.  You shouldn’t have to fight for a spot in someone’s life.  Never force someone to make a space in their life for you, because if they truly care about you, they will create one for you.  (Read The How of Happiness.)
  4. They offer each other freedom. – A healthy relationship keeps the doors and windows wide open.  Plenty of air is circulating and no one feelstrapped.  Relationships thrive in this environment.  Keep your doors and windows open.  If this person is meant to be in your life, all the open doors and windows in the world won’t make them leave.
  5. They communicate effectively. – It’s been said many times before, but it’s true: great communication is the cornerstone of a great relationship.  If you have resentment, you must talk it out rather than let the resentment grow.  If you are jealous, you must communicate in an open and honest manner to address your insecurities.  If you have expectations of your partner, you must communicate them.  If there are any problems whatsoever, you must communicate them and work them out.  And communicate more than just problems – communicate the good things too.
  6. They accept each other as is. – Trying to change a person never works. People know when they are not accepted in their entirety, and it hurts.  A real friend is someone who truly knows you, and loves you just the same.  Don’t change so people will like you.  Be yourself and the right people will love the real you.  If you feel like changing something about your friend, ask yourself what change you can make in yourself instead.
  7. They are genuine, and expect genuineness. – As Leo F. Buscaglia once said, “Never idealize others.  They will never live up to your expectations.  Don’t over-analyze your relationships.  Stop playing games.  A growing relationship can only be nurtured by genuineness.” Don’t play games with people’s heads and hearts.  Remember, love and friendship don’t hurt.  Lying, cheating and screwing with people’s feelings and emotions hurts.  Always be open, honest, and genuine.  (Read The Mastery of Love.)
  8. They compromise. – Real friends meet in the middle.  When there’s a disagreement, they work out a solution that works for both parties – a compromise, rather than a need for the other person to change or completely give in.
  9. They support each other’s growth changes. – Our needs change with time.  When someone says, “You’ve changed,” it’s not always a bad thing.  Sometimes it just means you grown.  Don’t apologize for it.  Instead, be open and sincere, explain how you feel, and keep doing what you know in your heart is right.
  10. They believe in each other. – Simply believing in another person, and showing it in your words and deeds, can make a huge difference in their life.  Studies of people who grew up in dysfunctional homes but who grew up to be happy and successful show that the one thing they had in common was someone who believed in them.  Do this for those you care about.  Support their dreams and passions and hobbies.  Participate with them.  Cheer for them.  Be nothing but encouraging.  Whether they actually accomplish these dreams or not, your belief is of infinite importance to them.
  11. They maintain realistic expectations of their relationship. – No one is happy all the time.  Friends must keep realistic expectations of each other.  Notice when you’re projecting something onto the other person that has nothing to do with them, like a fear from a past relationship, and then make an effort to let it go.  Recognize when you’re looking for that person to do something for you that you need to do for yourself, like making you feel lovable or take care of your needs, and then release those expectations and do it for yourself.
  12. They honor each other in small ways on a regular basis. – Honor your important relationships in some way every chance you get.  Every day you have the opportunity to make your relationship sweeter and deeper by making small gestures to show your appreciation and affection.  Remember, making one person smile can change the world.  Maybe not the whole world, but their world.  Your kindness and gratitude matters.  Make an effort to really listen – not just wait to talk.  See the other person as if for the first time.  It’s all too easy to take someone for granted.  Really notice all the wonderful things they do, and let them know what you see.
  13. They listen, and they hear every word. – Giving a person a voice, and showing them that their words matter, will have a long-lasting impact on them.  Less advice is often the best advice.  People don’t need lots of advice, they need a listening ear and some positive reinforcement.  What they want to know is often already somewhere inside of them.  They just need time to think, be and breathe, and continue to explore the undirected journeys that will eventually help them find their direction.
  14. They keep their promises. – Your word means everything.  If you say you’re going to do something, DO IT!  If you say you’re going to be somewhere, BE THERE!  If you say you feel something, MEAN IT!  If you can’t, won’t, and don’t, then DON’T LIE.  Real friends keep promises and tell the truth upfront.  (Read The Four Agreements.)
  15. They stick around. – The sad truth is that there are some people who will only be there for you as long as you have something they need.  When you no longer serve a purpose to them, they will leave.  The good news is, if you tough it out, you’ll eventually weed these people out of your life and be left with some great people you can count on.  We rarely lose friends and lovers, we just gradually figure out who our real ones are.